ना मातृभुमी से प्यार
ना जिन्हें यहां की संस्कृति पे गर्व है
ना कोई संस्कार
करते जो हर सनातनी त्योहारों पे वार
क्योंना माने उन्हें देशद्रोही?
जमाना था न ये दिलकश, तेरे दीदार से पहले । दीवाना हो गया था दिल, तेरे इजहार से पहले ।। कभी हाँ की,कभी न की, वो तेरी कशमकश तौबा । हजारों रंग वो आना, तेरे रूखसार पे पहले ।। जो तेरी आंख ...
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