जमाना था न ये दिलकश, तेरे दीदार से पहले ।
दीवाना हो गया था दिल, तेरे इजहार से पहले ।।
कभी हाँ की,कभी न की, वो तेरी कशमकश तौबा ।
हजारों रंग वो आना, तेरे रूखसार पे पहले ।।
जो तेरी आंख ने कहदी , जुवानी थी नहीं मुमकिन ।
कहानी अर्श तक पहुंची,तेरे इकरार से पहले ।।
हुराने-खुल्द सा होके, विसाल-ए- वक्त वो आना ।
खिले गुल दश्त-ओ-सहरा में, रूत-ए-वहार से पहले ।।
झरोंखों से निगाह मिलना वो कुछ लम्हे रूमानी थे ।
न जाने खो गए वो क्यों मेरे ऐतवार से पहले ।।
निगाहों से उतर कर रूह में, तुम रूह हो बैठे ।
सुना देखा नहीं ये फन, किसी फनकार से पहले ।।
कि जब वायदे मुनहसिर था तेरा जीना मेरा मरना ।
ये जां बाकी रही फिर क्यों तेरे इनकार से पहले ।।
------------ दीपक
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