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Showing posts from 2017

गुजर गयी ये शाम भी हर शाम की तरह

गुजर गयी ये शाम भी हर शाम की तरह  अपने ही शहर मे हूँ गुमनाम की तरह   दीवारे बंद कमरे की कुछ बोलती नही   आँखे एक दूसरे को टटोलती नही   मुस्कान होठो पर खोलती नही   रात बढ गयी है बढते दाम की तरह  गुजर गयी ये शाम भी हर शाम की तरह   अपने ही शहर मे हूँ गुमनाम की तरह  छायी है उदासी सबके चहरे उदास है  सब कुछ है फिर न जाने किसकी तलाश है   भाग दौड़ कर बुझ जायेगी ये कैसी प्यास है  इच्छा बढ गयी है बढते नाम की तरह  गुजर गयी ये शाम भी हर शाम की तरह   अपने ही शहर मे हू गुमनाम की तरह .

नदिया किनारे एक छोटा सा गांव

नदिया किनारे एक छोटा सा गांव  चंदा की चांदनी में मैं नंगे पांव ठंडी रेत पर मस्ती में लेट कर विरोधी को अपनी आवाजे लगाकर कुश्ती के अखाड़े में एक नया दांव नदिया किनारे एक छोटा सा गांव  चंदा की चांदनी में मैं नंगे पांव जलधर के ठंडे पानी में नहाना  पानी पर पत्थर को खूब नचाना बारिश की बूंदों में कागज की नाव नदिया किनारे एक छोटा सा गांव  चंदा की चांदनी में मैं नंगे पांव कपकपाती ठंडी में नानी की कहानियां आज है प्रेम के सागर में डूबती जवानियां कहां है वह अपनों से मिलने का चांव नदिया किनारे एक छोटा सा गांव  चंदा की चांदनी में मैं नंगे पांव

ना हिंदू मर रहा है ना मुसलमान मार रहा है

ना हिंदू मर रहा है ना मुसलमान मार रहा है इन धर्मो के झगड़े में हिंदुस्तान मर रहा है लगाकर आग अपने ही घरों मे इज्जत नीलाम कर रहा है देकर इसे इबादत का नाम  खुदा को अपने बदनाम कर रहा है ना हिंदू मर रहा है ना मुसलमान मार रहा है इन शैतानी   झगड़े में इंसान मर  रहा है   मुगलो अंग्रेजो की गुलामी मे  जो खत्म ना हुआ कभी  आज आजाद हिन्दुस्तान मे  तू उसके खात्मे से डर रहा  ना हिंदू मर रहा है ना मुसलमान मार रहा है इन धर्मो के झगड़े में हिंदुस्तान मर रहा है

कोई हमको भी बतलाए इसमें लिखा क्या है

मेरी सांसों में वफा की खुशबू तो है सोमनी वाले तेरा पता क्या है तेरे रहने की जगह तो मेरे दिल में थी तुम ही ना आए तो मेरी खता क्या है रूठने वाली मुझसे इतना तो कह मेरे इस जुर्म की सजा क्या है मुझ से पाला है उस दर्द को  मुझसे पूछ साथ जीने में उसके मजा क्या है नाम लिखे जो खत तेरे पास मेरे शिवा उसके बचा क्या है तमाम राज जो उनसे कह ना सके अब तन्हा इस दिल में सोर मचा क्या है  कभी जब मौत की वफाई सुनता हूं सोचता हूं जीने में रखा गया है वह सुनती है इस गजल को बार-बार कोई हमको भी बतलाए इसमें लिखा क्या है  
निकाल कर दिल से अपने घर में जगह देते हो रूठ कर हमसे गैरों को मना लेते हैं हमें भूल जाओ हमेशा के लिए सुनाकेे मौत का फरमान जीने की सलाह देते हैं

tu to acha lagta hai magar

mujhe tu to acha lagta hai teri judai achi nhi lagi ye sardiya to thik hai magar bina rajai ye rajai achi nhi lagti mere shar me dost to kafi hai magar is ghar ki suni  charpai achi nhi lagti. tu to acha lagta hai teri judai achi nhi lagti duniya me hangama to acha hai magar is dil me ye tanhai achi nhi lagti tu to acha lagta hai magar teri judai achi nhi lagti मुझे तू तो अच्छा लगता है मगर, तेरी रुशवाई  अच्छी नही लगती, ये सर्दिया तो ठीक है मगर, बिना तेरे ये रजाई अच्छी नही लगती। मेरे शहर मे दोस्त तो काफी है मगर, इस घर की चारपाई अच्छी नही लगती, तेरा मिलना तो अच्छा लगता है मगर, तेरी जुदाई अच्छी नही लगती। जहां मे हंगामा तो अच्छा लगता है मगर , इस दिल मे तनहाई अच्छी नही लगती, तू तो अच्छा लगता है मगर, तेरी रुशवाई अच्छी नही लगती।।

ना मातृभुमी से प्यार ना जिन्हें यहां की संस्कृति ...

ना मातृभुमी से प्यार ना जिन्हें यहां की संस्कृति पे गर्व है ना कोई संस्कार करते जो हर सनातनी त्योहारों पे वार क्योंना माने उन्हें देशद्रोही?

काश फिर मिलने की वजह मिल जाए,

काश फिर मिलने की वजह मिल जाए, साथ जितना भी बिताया वो पल मिल जाए, चलो अपनी अपनी आँखें बंद कर लें, क्या पता ख़्वाबों में गुज़रा हुआ कल मिल जाए