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Showing posts from 2018

जमाना था न ये दिलकश, तेरे दीदार से पहले

जमाना था न ये दिलकश, तेरे दीदार से पहले । दीवाना हो गया था दिल, तेरे इजहार से पहले ।। कभी हाँ की,कभी न की, वो तेरी कशमकश तौबा । हजारों रंग वो आना, तेरे रूखसार पे पहले ।। जो तेरी आंख ...

निकलकर झोपड़ों से जब से शहर में आ गए

निकलकर झोपड़ों से जब से शहर में आ गए, सुख चैन जिंदगी के ना जाने कहां गए।  हवा यहां पर अब लगती नहीं है,  धूप जैसे यहां निकलती नहीं है , शाम के वो खाली पल ना जाने कहां गए, निकलकर झोपड़ों से जब से शहर में आ गए , सुख चैन जिंदगी के ना जाने कहां है । स्वाद रोटियों में यहां आता नहीं है,  बुरा के साथ चावल कोई खाता नहीं है, गिंदोड़े वो  गुड़ के ना जाने कहां गए,  निकलकर झोपड़ों से जब से शहर में आ गए, सुख चैन जिंदगी के ना जाने कहां गए।